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सुनामी- राष्ट्र के लिए रिपोर्ट

3 जून, 2005

सुनामी राहत एवं पुनर्वास कार्यों के लिए धन एकत्र करने हेतु भारत की जनता ने उदार हृदय से जो प्रयास किए हैं उनके लिए मैं अभिभूत हूं| प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय राहत कोष में जितना अंशदान दिया गया, इससे पहले कभी नहीं दिया गया| यह निधि आपदा पीड़ितों को राहत एवं सहायता उपलब्ध कराने में मददगार साबित हुई है| हमारी सरकार इस आपदा के बाद बचने वालें लोगों  के जीवन और आजीविका के पुनर्निर्माण और उनमें आशा की नई किरण जगाने के लिए वचनबद्ध है|

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, जनवरी 2005

I-                 आपदा

देश 26 दिसंबर,2004 का वह दिन कभी नहीं भूलेगा, जब सुमात्रा के तट पर 8.6 की तीव्रता वाले भूकंप से उठी घातक सुनामी हजारों बहुमूल्य जीवों को बहा कर ले गई और जिसने कृषि, पशुधन तथा बुनियादी सुविधाओं को भारी क्षति पहुँचाई| भारत ने, हिन्द महासागर के तट पर स्थित अन्य देशों जैसे- इंडोनेशिया, श्रीलंका, मालदीव और थाईलैंड के साथ इस दुखद घटना का सामना किया| इसमें 3,00,000 से अधिक लोग मारे गए जिसमें से 12,405 भारतीय थे- आंध्र प्रदेश में 107, केरल में 177, तमालनाडु में 8009, पुद्दुचेरी में 599 और अंडमान निकोबार में 3513 लोग मारे गए|  विदेश में 14 भारतीयों की जान गई| जिसमें श्रीलंका में 13 और मालदीव में 1 भारतीय था। सुनामी से उठी ज्वार तरंगे 700-800 कि.मी. प्रति घंटा की रफ्तार से आगे बढ़ीं और अफ्रीका के तट तक पहुंच गईं| सुमात्रा तट के साथ लगे होने के कारण निकोबार द्वीपसमूह में सबसे अधिक क्षति हुई| कोरल रीफ, सुंदर तटरेखा, कृषि और नारियल के पेड़ सब टूट कर बह गए|

देश के लिए सुनामी आपदा नई घटना थी| यह अपनी तीव्रता, परिमाण और विस्तार की दृष्टि से अभूतपूर्व घटना थी जो मुख्य भूभाग से 1400 कि.मी. दूर हिन्द महासागर के बीचों बीच बसे अंडमान निकोबार द्वीपसमूह से लेकर आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और संघ राज्यक्षेत्र पुद्दुचेरी तक थी।| पूर्ववर्ती सभी प्रमुख आपदाएं संबंधित राज्यों तक ही सीमित थीं, जैसे 1993 में लातूर में भूकंप, 1999 में उड़ीसा में तीव्र चक्रवात और 2001 में गुजरात में भूकंप|

आंध्र प्रदेश में 1.96 लाख, केरल में 13 लाख, तमिलनाडु में 8.97 लाख, पुद्दुचेरी में 0.43 लाख और अंडमान निकोबार में 3.56 लाख लोगों सहित 1,089 गांवों में कुल 27.92 लाख लोग प्रभावित हुए| सुनामी से 2.35 लाख घर क्षतिग्रस्त हो गए| आंध्र प्रदेश में 481, केरल में 13735, तमिलनाडु में 1,90,000, पुद्दुचेरी में 10061 और अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में 21,100 घर क्षतिग्रस्त हुए| घरों के अलावा लोगों ने अपनी आजीविका भी खो दी-83,788 नौकाएं क्षतिग्रस्त हो गईं, 39,035 हेक्टेयर शस्य क्षेत्र प्रभावित हुआ| इसमें आंध्र प्रदेश में 302 हेक्टेयर, केरल में 7763 हेक्टेयर, तमिलनाडु में 19168 हेक्टेयर, पुद्दुचेरी में 792 हेक्टेयर और अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में 11,010 हेक्टेयर है| 31755 पशुओं का नुकसान हुआ| इन क्षेत्रों में सामाजिक बुनियादी सुविधाएं, जैसे स्कूल,  प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पेयजल आपूर्ति, आंगनवाड़ी और अन्य सामुदायिक परिसंपत्तियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं| आधारभूत संरचना को भी व्यापक क्षति पहुँची जिसमें विशेष रूप से द्वीपसमूह में नौवहन क्षेत्र क्षतिग्रस्त हुआ, जहां बंदरगाह और घाट, जो द्वीपसमूह का जीवन थे, नष्ट हो गए| साथ ही सड़क और पुल, विद्युत एवं संचार प्रणाली भी प्रभावित हुई| आर्थिक दृष्टि से लगभग 11,544.91 करोड़ रु. के नुकसान का आकलन किया गया, जिसमें आंध्र प्रदेश में 342.67 करोड़ रु., केरल में 2371.02 करोड़ रु., तमिलनाडु में 4528.66करोड़ रु., पुद्दुचेरी में 466 करोड़ रु. और अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में 3836.56 करोड़ रु. का नुकसान हुआ|

II      कार्य  

भारत सरकार ने तुरंत प्रभावित राज्यों से संपर्क किया और इतने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया जो कि पहले कभी नहीं किया गया था| इस घटना की जानकारी मिलने के एक घंटे के अंदर दो विमान भेजे गए-एक प्रारंभिक सर्वेक्षण के लिए और दूसरा राहत कार्यों के लिए|  भारत सरकार ने पड़ोसी देशों-श्रीलंका, मालदीव और इंडोनेशिया की भी सहायता करने का निर्णय किया जो सुनामी से बुरी तरह प्रभावित हुए थे| इस घटना के तुरंत बाद राष्ट्रीय प्रबंधन समिति सक्रिय हो गई और तीन घंटे के अंदर एकजुट हो गई ताकि तत्काल किए गए उपायों की समीक्षा की जा सके| आपदा से निपटने के लिए स्पष्ट कार्यनीति निर्धारित की गई जिसमें तत्काल राहत और बचाव कार्य, उसके बाद अस्थायी पुनर्वास, प्रभावित परिवारों का भरण-पोषण और आजीविका के साधनों का पुनरुद्धार शामिल था| इसके बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए दीर्घावधि योजना बनाई गई|

घटना के प्रभाव का आकलन करने के लिए द्वीपसमूह से महासागर तक सुनामी प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वेक्षण किया गया  और प्रभावित क्षेत्रों तथा संघ राज्यक्षेत्रों में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य करने के लिए भारत सरकार ने 700 करोड़ रु. की राशि जारी की, जिसमें तमिलनाडु के लिए 250 करोड़ रु., आंध्र प्रदेश के लिए 100 करोड़ रु., केरल के लिए 100 करोड़ रु., पुद्दुचेरी के लिए 50 करोड़ रु. और अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के लिए 200 करोड़ रु. जारी किए गए।  सभी राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों में न केवल घटना स्थल पर क्षति का आकलन करने के लिए बल्कि समस्याग्रस्त क्षेत्रों को समझने और तत्काल राहत के लिए लोगों की जरूरतों को जानने के लिए भी केंद्रीय दल तैनात किए गए|  अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के लिए सैन्य और सिविल प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से किए गए राहत और बचाव कार्यों के कारगर समन्वय के लिए उप राज्यपाल के अधीन एकीकृत राहत कमांड (आई आर सी) का गठन किया गया|

सशस्त्र सेनाओं की मदद से व्यापक स्तर पर तलाश और बचाव कार्य किए गए थे| इस कार्य में केंद्रीय परा-सैन्य बलों और दो मेडिकल फर्स्ट रेसपोंडर्स (एम एफ आर), विशेष रूप से गृह मंत्रालय की प्रशिक्षित टीम ने सहयोग किया| तलाश और बचाव कार्य के लिए कुल 20,907 कार्मिकों में 8300 कार्मिक सेना के, 5500 नौसेना के, 3000 वायुसेना के, 2000 तटीय गार्ड और 2107 सी पी एम एफ के कार्मिक थे| इस कार्य के लिए 40 समुद्री जहाज, 34 विमान और 42 हेलीकॉप्टर लगाए गए थे| इतने बड़े पैमाने पर ऐसे समन्वित कार्य देश के इतिहास में पहले कभी नहीं किए गए| तत्काल किए जाने वाले कार्यों में असहाय और संकटग्रस्त लोगों की तलाश कर उन्हें बचाना, फंसे हुए लोगों को निकालकर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाना और उन्हें अस्थायी आवास और राहत शिविर उपलब्ध कराना था|  शवों की तलाश कर उनका अंतिम संस्कार करना चुनौतीपूर्ण कार्य था|

इस कार्य में कुल 28,734 लोगों को बचाया गया जिनमें 9500 तमिलनाडु के, 9950 केरल के और 9284 अंडमान निकोबार के थे| लगभग एक हजार लोग विवेकानंद रॉक मेमोरियल में फंसे थे| प्रारंभ में हेलिकॉप्टर से और बाद में बड़ी नौकाओं की सहायता से उन्हें बचाया गया| यह कार्य रात भर जारी रहा| कुल 6.47 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया था|     नागर विमानन मंत्रालय  ने  फंसे हुए 6318 लोगों को बाहर निकलाने के लिए 27 दिसंबर से 1 जनवरी 2005 के बीच 64 विशेष उड़ानों का प्रचालन किया। इसमें अंडमान निकोबार द्वीप समूह में फंसे पर्यटकों को मुख्यभूमि तक लाना भी शामिल था।

 शवों को पता करना  और उनका अंतिम संस्कार करना तात्कालिक आवश्यकता थी। शवों को ढूँढ़ने  और उनके अंतिम संस्कार के लिए  केंद्रीय अर्ध सैनिक बल कर्मी और मुंबई नगरपालिका के कर्मचारियों को तमिलनाडु के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों व द्वीपों पर भेजा गया। शीघ्र अंतिम संस्कार करने से क्षेत्र की शीघ्र सफाई हुई और बाद में हो सकने वाली महामारियों से बचा जा सका। 

 6.04 लाख प्रभावित लोगों को आश्रय देने के लिए कुल 930 राहत कैंप लगाए गए। राहत कैम्पों में भोजन,  पेयजल, कपड़े स्वास्थ्य रक्षा और चिकित्सा संबधी सामग्री की व्यवस्था की गयी। शिशुओं के लिए विशेष पोषण (शिशु-आहार) की भी व्यवस्था की गयी थी। लोग राहत कैम्पों में मुख्य भूमि पर दो माह और द्वीपों पर लगभग पांच माह तक रहते रहे। तेरह प्रभावित द्वीपों में से छः को पूर्णतः खाली कराया गया और प्रभावित व्यक्तियों को पास के द्वीपों/ पोर्ट ब्लेयर अथवा मुख्य भूभाग पर पहुँचाया गया।

 प्रभावित क्षेत्रों में सामान की व्यवस्था करना बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य था। पेयजल सहित द्वीपों पर पहुंचाई जाने वाली सभी सामग्री  को समुद्र अथवा वायु मार्ग से 1400 किलोमीटर भेजा गया। इसके साथ ही मुख्य भू-भाग के लिए भी सामग्री की आवश्यकता थी। अंडमान निकोबार द्वीपसमूह की सड़कें अस्पताल,  वैद्युत दूरसंचार स्कूल व आधारिक संरचना प्रायः नष्ट हो गयी थी। प्रभावित द्वीपों में जलस्रोत नष्ट हो जाने से पेयजल भी उपलब्ध नहीं था। इसलिए भारत सरकार ने राज्य-सरकारों की सहायता से राहत सामग्री के लिए भुज, अहमदाबाद, दिल्ली, भोपाल, मुंबई,  भुवनेश्वर,  कोलकाता और बेंगलूर में आठ केंद्र स्थापित किए।  राहत सामग्री एकत्र करने का कार्य इन केंद्रों को सौंपा गया और यहाँ से सामग्री वायुमार्ग से द्वीपों व पड़ोसी देशों को भी पहुँचाई गई। राहत और बचाव कार्य के आपातकाल के दौरान 8890 मीट्रिक टन राहत सामग्री जुटाई गई और भेजी गई, जिसमें से 6,830 मीट्रिक टन राहत सामग्री सिर्फ अंडमान निकोबार द्वीपसमूह को भेजी गई। इसमें 724 मीट्रिक टन पेयजल, 742 मीट्रिक टन खाद्य सामग्री, 260 मीट्रिक टन वस्त्र, 10,000 तंबू,  715 जनरेटर, और दवाइयाँ, पंपसेट, बेली ब्रिज और विलवणीकरण संयंत्र शामिल थे। राहत सामग्री जुटाना और भेजना एक भगीरथ प्रयास था। एक ओर निरंतर दैनिक आवश्यकता का मूल्यांकन करना था तो दूसरी ओर सामग्री को उठाने और भेजने के लिए सशस्त्र सेनाओं के साथ निरंतर समन्वय करना था। राहत सामग्री संबंधी समन्वय के लिए दो अधिकारियों को चेन्नै व कोलकाता में नियुक्त किया गया था।

 स्वास्थ्य मंत्रालय के दलों को मुख्य भू भाग स्थित राज्यों /संघ राज्य क्षेत्र तथा द्वीपों पर तत्काल भेजा गया। केंद्र व राज्यों से कुल मिलकर 1369 चिकित्सा दलों को तैनात किया गया। यह सुनिश्चित किया गया कि आपदा के कारण कोई महामारी नहीं फैले। 

 भारत सरकार ने सुनामी प्रभावित अन्य देशों यथा मालदीवथाईलैंड व इंडोनेशिया को भी राहत प्रदान की। श्रीलंका के लिए 100 करोड़ की समग्र सहायता अनुदान राशि घोषित की गयी। भारतीय नौसेना ने श्रीलंका को सहायता व बचाव प्रदान करने के लिए ऑपरेशन रेनबो आरम्भ किया। हेलीकाप्टर व चिकित्सा दल युक्त भारतीय नौसेना के सात जहाज तैनात किए गए। इनमें एक विशेषज्ञ चिकित्सालय पोत शामिल था। सेना के एक क्षेत्रीय चिकित्सालय की भी स्थापना की गई। तात्कालिक राहत पहुँचाने के साथ साथ भारतीय राहत दलों ने अत्यावश्यक मूलभूत संरचना की मरम्मत की। पेयजल आपूर्ति स्रोतों को साफ किया व जलापूर्ति बहाल की तथा संचार माध्यमों को पुनर्स्थापित करने के लिए जनरेटर सेट व अन्य सफाई उपकरण उपलब्ध कराए।  भारतीय वायुसेना के  आई एल-76 विमान एम आई व  चेतक हेलीकाप्टर राहत कार्यों में लगाए गए।

 मालदीव के लिए करोड़ रूपए के मिश्रित राहत पैकेज की घोषणा की गई। मालदीव के लिए ऑपरेशन कैस्टर के तहत 50 सैन्य राहत दल (सोर्टी )भेजे गए और चार विमान व दो नौसेना पोत राहत कार्यों में लगाए गए । भारत सरकार ने थाईलैंड के लिए पांच लाख यू एस डॉलर की राहत सामग्री का अनुमोदन किया। भारत ने इंडोनेशिया के लिए 10 लाख यू एस डॉलर की राहत सामग्री की घोषणो की और भारतीय नौसेना ने  इंडोनेशिया को राहत सहायता प्रदान करने के लिएऑपरेशन गंभीर आरम्भ किया। भारतीय नौसेना का चिकित्सा पोत तैनात किया गया।  एक पोत  को चिकित्सालय में परिवर्तित किया गया। भारतीय वायुसेना के विमान सैन्य राहत दल लेकर गए। 28 मार्च 2005 को सुमात्रा से थोड़ा हटकर स्थित इंडोनेशिया के निअस द्वीप पर आए भूकंप के बाद भारत सरकार ने 20 लाख यू एस डॉलर की  सहायता प्रदान की। 

सभी बचाव कार्यों का संचालन  गृह मंत्रालय के आपदा प्रबंधन प्रभाग ने किया और इस दल ने चौबीसों घंटे कार्य किया। राहत कार्यों के लिए प्रमुख मंत्रालय गृह मंत्रालय था जिसने सभी राज्यों व संघ राज्य क्षेत्रों से निरंतर संपर्क बनाए रखा और राहत व बचाव कार्यों से संबंधित प्राथमिकताएँ आवश्यकता व वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार तय की गईं। रक्षा मंत्रालय के एकीकृत रक्षा स्टाफ संचालन  कक्ष  द्वारा सशस्त्र सेनाओं के सदस्यों और माल सम्बन्धी व्यवस्था में सहायता प्रदान की गयी। भारत सरकार के अन्य मंत्रालयों जैसे दूरसंचारविद्युतसड़क परिवहन व राजमार्गपोत परिवहनपेयजल व् स्वास्थ्य मंत्रालयों द्वारा भी अपातकालीन सहायता प्रदान की गई। गृह मंत्रालय ने वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्र में संपर्क कार्य करने के लिए तैनात किया। जिन अधिकारियों ने पहले द्वीपों पर कार्य किया था उनके समूह को अंडमान निकोबार में तैनात किया गया ताकि वे वहां सहायता प्रयासों को समन्वित कर सकें।

 III पुनर्वास

आवश्यक मूलभूत सुविधाओं जैसे यातायात दूरसंचार, विद्युत, और जलापूर्ति को पुनर्स्थापित करना महत्वपूर्ण था। द्वीप पर अधिकांश जल स्रोत नष्ट अथवा प्रदूषित हो गए थे। पहले चरण में  सभी प्रभावित द्वीपों पर मुख्य भू-भाग से पेयजल पहुँचाया गया। पेयजल आपूर्ति विभाग ने प्रभावित स्रोतों के विलवणीकरण और शुद्धीकरण तथा पेयजल आपूर्ति के पुनर्स्थापन के लिए अपने दल तैनात किए। दूरसंचार मंत्रालय ने संचार संपर्क स्थापित करने के लिए उपकरण के साथ इंजीनियरों व तकनीशियनों के दल तैनात किए। द्वीपों के अंतर्गत संपर्क स्थापित करने के लिए द्वीपों पर सैटेलाइट फोन उपलब्ध कराए गए। द्वीपों के मौजूदा संयंत्रों को पुनर्स्थापित कर विद्युतापूर्ति बहाल करने के लिए विद्युत मंत्रालय के दलों को तैनात किया गया। कैंप को तात्कालिक विद्युतापूर्ति व अन्य आवश्यक यंत्र स्थापित करने के लिए डीज़ल जनरेटर सेट मुहैया कराए गए।

 द्वीपों के अधिकांश घाट व बंदरगाह क्षतिग्रस्त हो गए थे अतः वहाँ सिर्फ हेलीकॉप्टरों के माध्यम से पहुँचा जा सकता था। यद्यपि पहले चरण में इन द्वीपों को सभी राहत हेलीकॉप्टरों के माध्यम से पहुँचाई गई, घाटों व बंदरगाहों की तात्कालिक मरम्मत/पुनर्स्थापन का कार्य युद्ध-स्तर पर आरंभ किया गया। नावों के पुल द्वारा अस्थाई घाट बनाए गए। जहाँ ऐसा करना संभव नहीं था, नौसेना की एल.सी.टी प्रणाली से रेतीले तटों  की खोज की गई और राहत सामग्री को इन तटों पर जहाज से उतारा गया। प्रभावित लोगों को राहत पहुँचाने के लिए चिकित्सा पोतों को समुद्र-तट से दूर खड़ा किया गया। मुख्य भू-भाग के बंदरगाहों को 24 घंटे में काम में आने लायक ठीक कराया गया। 

दूरियाँ और क्षेत्रों की अगम्यता राहत कार्यों और मूलभूत संरचना की पुनर्स्थापना में एक बहुत बड़ी चुनौती थी। किंतु विशेषज्ञों ने लगातार काम करके मूलभूत संरचना की पुनर्स्थापना की और मुख्य भू-भाग में आम जीवन को सामान्य किया। अंडमान निकोबार के उन क्षेत्रों को सामान्य करने में समय लगा जहाँ पहुँचना कठिन था। अंडमान निकोबार द्वीप श्रृंखला 724 किलोमीटर में फैली है ओर इसी से इनके निरीक्षण ओर राहत कार्यों के समन्वय में चुनौतियाँ सामने आईं। सशस्त्र सेनाओं ने न सिर्फ राहत और बचाव कार्यं में अपितु संपर्क स्थापित करने में अहम् व महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार निकोबार का क्षतिग्रस्त वायुसेना बेस जहाँ से 116 अधिकारी, सेवाकार्मिक व उनके परिवार बह गए थे उनको भी कुछ ही घंटों में कार्य योग्य बनाया गया  और तकनीकी उपकरण की सहायता के बिना विमानों को उतारा गया। अत्यंत संतोष की बात है कि राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तर पर संपूर्ण तंत्र ने संबद्ध होकर कार्य किया और उनके कार्य को सभी ने सराहा।

 मंत्रिमंडलीय सचिव की अध्यक्षता में सचिवों की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति ने राष्ट्रीय प्रयासों की लगातार समीक्षा और निगरानी की। इनका मार्गदर्शन प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल समूह ने किया। यह समूह प्रतिदिन बैठक कर आपदा प्रबंधन प्रयासों को संचालित करता रहा। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और रक्षामंत्री ने तत्काल प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। इसके बाद अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने क्षेत्र का दौरा किया। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यू.पी.ए) के अध्यक्ष और सभी मुख्य राजनीतिक पार्टियों के नेता और संसद सदस्यों ने भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। जन प्रतिनिधियों और नागरिकों से मिले सुझावों से आपदा प्रबंधन नीति तैयार करने में सहायता मिली। सरकार राहत व बचाव कार्यों की निरंतर निगरानी करती रही है।

 सुनामी आपदा के अपने विशिष्ट लक्षण थे। इससे तटवर्ती मछुआरा समुदाय सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ। मृतकों में 75% महिलाएँ और बच्चे थे। 480 बालक ( आँध्र प्रदेश 6, केरल -3, तमिल नाडु-289, पुद्दुचेरी -39, अंडमान निकोबार द्वीपसमूह 143) अनाथ हुए और 787 महिलाएँ (- आँध्र प्रदेश में 18, केरल में 31, तमिल नाडु में 562, पुद्दुचेरी में 28 और अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में 148 ) विधवा हो गईं। 18 वर्ष से अधिक की ऐसी कईं युवतियाँ थी जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु हो गई थी। समस्या का यह सामाजिक परिप्रेक्ष्य चिंता का विषय था। सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय ने अनाथ बच्चों, अविवाहित युवतियों और विधवाओं के संरक्षण और पुनर्वास की जिम्मेदारी ली। अंडमान निकोबार द्वीपसमूह पर परंपरा के अनुसार जनजातीय समुदाय ने अपनी जनजाति के अनाथ बालकों का ध्यान रखने और उनकी सहायता करने का निर्णय लिया। अन्य मामलों में राज्यों द्वारा संचालित अनाथालयों और संभव होने पर रिश्तेदारों द्वारा ध्यान रखना सुनिश्चित किया गया। इन संवेदनशील बच्चों  और महिलाओं की मानसिक वेदना को रिश्तेदारों व समुदाय के भावानात्मक संबल और सरकार द्वारा राष्ट्रीय व राज्य दोनों स्तर पर प्राप्त सहायता ने कुछ कम किया।

 प्रभावित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में तैनात केंद्रीय दलों के आकलन पर 3644.05 करोड़ रुपए के विशेष पैकेज जिसे सुनामी प्रभावित क्षेत्रों के लिए राजीव गाँधी पुनर्वास पैकेज कहा गया, अनुमोदित किया गया जिसके अंतर्गत तात्कालिक राहत व बचाव कार्यों के लिए सहायता, मत्स्य पालन व कृषि क्षेत्रों के पुनर्वास, अस्थायी(अंतरिम) आश्रयों और मूलभूत संरचना की मरम्मत/पुनर्स्थापन किया गया। इसमें से 2036.95 करोड़ का अनुमोदन तात्कालिक राहत व बचाव कार्यों के लिए था जिसमें मृतकों के परिवारों को दिया जाने वाला अनुग्रह अनुदानराहत कैंप स्थापित करने व चलाने, कपड़ों व बर्तनों, गुज़ारा भत्ता, तत्काल जलापूर्ति व राहत रोजगार संबंधी व्यय शामिल हैं।

    राजीव गाँधी विशेष पैकेज के अंतर्गत अनुमोदित अनुग्रह अनुदान के अतिरिक्त मृतकों के परिवारों को प्रधानमंत्री राहत कोष से एक लाख रुपए और मुख्यमंत्री राहत कोष से पचास हज़ार रुपए का अनुग्रह अनुदान घोषित किया गया। लापता व्यक्तियों के लिए अनुग्रह अनुदान संबंधी दिशानिर्देशों को सरलीकृत किया गया ताकि परिवार के जीवित सदस्यों को तत्काल सहायता प्रदान की जा सके। अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में हर अनाथ बालक को दो लाख रुपए अतिरिक्त दिए गए जो उनके वयस्क होने तक बैंक खाते में रहेंगे। भारत सरकार ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिवारों को दिए जाने वाले अनुग्रह अनुदान की एक लाख रुपए की संपूर्ण राशि के अतिरिक्त एक लाख रुपए का अनुग्रह अनुदान दिया । इसी प्रकार अविवाहित युवतियों और विधवाओं को एक लाख रुपए की सहायता राशि दी गई। मुख्य भू-भाग में प्रभावित परिवारों के प्रत्येक व्यक्ति को तीन माह के लिए और द्वीपों में छः माह के लिए निर्वाह भत्ते के लिए 155.19 करोड़ रुपए अनुमोदित किए गए। राहत रोजगार के लिए 93.00 करोड़ रुपए का 93000 मीट्रिक टन खाद्यान्न आबंटित किया गया जिससे 1.86 करोड़ श्रम दिवस बनें। 

      अंतरिम पुनर्वास के लिए भारत सरकार ने 212.84 करोड़ रुपए की लागत पर अस्थाई आश्रयों का निर्माण किया। राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में कुल 39,171 अस्थाई आश्रयों का निर्माण किया गया है। इनमें से 9572 अस्थाई आश्रयों का निर्माण अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में किया गया। इसके लिए कर्मचारियों और माल की व्यवस्था करना  चुनौतीपूर्ण कार्य था। लगभग सभी  निर्माण सामग्री को मुख्य भू-भाग सें भेजा जाना था। इसके लिए 15,000 मीट्रिक टन सी.जी.आई शीट, खंभे और अन्य सामग्री को रेलगाड़ी से व उसके बाद पोत से द्वीपों पर भेजा जाना था। यह बृहत व्यवस्था मानसून आरंभ होने से पहले पूरी हो गई। सभी आश्रय भर चुके हैं। 

       समुद्र तट के साथ स्थित मछुआरा समुदाय ने अन्यथा अनुकूल समुद्र का सबसे अधिक प्रकोप वहन किया; उन्होंने न सिर्फ अपने प्रियजनों को खोया अपितु अपना आजीविका का साधन भी खोया। इसी कारण से राजीव गाँधी विशेष पैकेज में 1199.85 करोड़ रुपए मछुआरा समुदाय के पुनर्स्थापन के लिए था। इसमें न सिर्फ खोयी हुई परिसंपत्ति जैसे नाव व जाल को पुनः प्राप्त करना अथवा जहाँ अपेक्षित हो उनकी मरम्मत अथवा मछुआरा चाहे तो अपनी नाव को फाइबर/मोटरचालित में परिवर्तित करने के लिए सहायता शामिल है। 

विशेष पैकेज के अंतर्गत मछुआरों को दी जाने वाली राहत के मानक निम्नानुसार हैं 

क)   32000 रुपए प्रति यूनिट तक कटमरैन नौकाओं  और जालों के प्रतिस्थापन

पूर्ण सब्सिडी(अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के मामले में मुख्य भूभाग से  यातायात सहित 65,000 रुपए)

ख)   डेढ़ लाख रुपए प्रति यूनिट तक नौकाओं  और मोटर व जालों का प्रतिस्थापन

50सब्सिडी व 50% ऋण

ग)    बीस लाख रुपए प्रति यूनिट तक मशीनी नावों और जालों का प्रतिस्थापन

35% सब्सिडी(5 लाख की सीमा तक) व शेष ऋण

घ)    यंत्रचालित नावों की मरम्मत

60% सब्सिडी (3 लाख की सीमा तक) व शेष ऋण

ङ)     अन्य सभी प्रकार की नावों की मरम्मत

10,000 रुपए तक पूर्ण सब्सिडी

नोट- पैकेज () के अंतर्गत आने वाले मछुआरों को ऊपर उल्लिखित पैकेज () चुनने का विकल्प होगा।

बैंकों की सहायता से 7% प्रति वर्ष की कम दर से ऋण की व्यवस्था की गई। इसके अतिरिक्त तुरंत अदायगी के मामले में ब्याज सब्सिडी भी दी जाएगी। इसके बाद ऋण के भुगतान पर रोक डेढ़ वर्ष के लिए होगी और उसके बाद चुकौती की अवधि सात वर्ष होगी। प्रभावित मछुआरों के ऋण बकाया होने पर भी उन्हें ऋण मिल सकेगा।

इतने बड़े पैमाने पर नावों को बदलने और उनके पुनर्निर्माण के लिए सामग्री और उत्पादन सुविधाएँ व्यवस्थित करने, विशेष रूप से फाइबर ग्लास नावों के लिए, विशेष प्रयासों की आवश्यकता थी। लकड़ी की नावों के लिए लट्ठों की भी कमी थी, और उनकी व्यवस्था दूसरे राज्यों से की गई। भगीरथ प्रयासों के बाद यह सभी व्यवस्था संभव हो सकी। इसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में काफी प्रगति हुई। अब तक तमिलनाडु में कटमरैन नौकाओं  और 11657 जालों के प्रतिस्थापन के लिए 33.12 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी गई है। 12715 नावों की मरम्मत के लिए मछुआरों को 14.18करोड़ रुपए की सब्सिडी दी गई।  इसके अतिरिक्त बाहरी इंजन वाली मोटरबोटों, आंतरिक इंजन वाली मोटरबोटों और मछली पकड़ने के उपकरणों को हुई क्षति  के लिए  45.86 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी गई।  254 मामलों में यंत्रचालित नावों और जालों के लिए 39.01 करोड़ रुपए की सब्सिडी और 8.49 करोड़ रुपए का ऋण दिया गया है। पुड्डुचेरी में 5389 इकाई नावों के लिए कटमरैन नौकाओं के प्रतिस्थापन के लिए 13.92 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी गई।  801 मोटर बोटों के लिए 8.01 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी गई।  यंत्रचालित नावों के मामले में 221 नावों के लिए 8.19 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी गई।  इसी तरह 7.65 करोड़ रुपए के अनुदान से 234 यंत्रचालित नावों की मरम्मत की गई। अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह में अब तक 225 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त नावों की मरम्मत की गई और 324 नावों की मरम्मत के आदेश दिए जा चुके हैं। केरल में 0.98 करोड़ रुपए की सब्सिडी से 471 कटमरैन नौकाओं को बदला गया है और 553 की मरम्मत की गई है। 1.11 करोड़ रुपए की सब्सिडी से 63 इंजनयुक्त नौकाओं को बदला गया है और 581 की मरम्मत की गई है। 1.71 करोड़ रुपए की सहायता से 146 आउट-बोर्ड मोटरों को बदला गया तथा 199 की मरम्मत की गई | जाल के लिए भी 3.95 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए गए | आंध्र प्रदेश में 2.67 करोड़ रुपए की सहायता से 211 पारंपरिक नावों को बदला गया तथा 4095 की मरम्मत की गई| 1.85 करोड़ रुपए की सहायता से 52 इंजन युक्त नावों को बदला गया तथा 2111 की मरम्मत की गई| मछली पकड़ने वाले जाल को बदलने के लिए भी 7.69 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध करवाई गई| 

राजीव गाँधी विशेष पैकेज में स्थायी आवास एवं क्षतिग्रस्त मूलभूत संरचनाओं की मरम्मत के लिए 1607.10 करोड़ रुपए शामिल हैं| इसमें से 752.30 करोड़ रुपए की राशि स्थाई आवासों के लिए निर्धारित की गई है| स्थाई आवासों हेतु इस राशि की मंजूरी भारत सरकार द्वारा दी जाएगी, जिसे योजना आयोग के एक कोर समूह द्वारा अंतिम रूप दिया जा रहा है| अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के मामले में शहरी विकास मंत्रालय ने उपयुक्त नगर आयोजना एवं सिविक सुविधाओं से युक्त 9350 बहु-खतरा रोधी आवासों के निर्माण हेतु 656 करोड़ रुपए की परियोजना प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया है| डिज़ाइन एवं ले-आउट लाभार्थियों के परामर्श से तैयार किया गया है|

       राजीव गाँधी विशेष पैकेज का राज्यवार ब्यौरा निम्नलिखित है - ‌‌तमिलनाडु – 2347.19 करोड़ रुपए, आँध्र प्रदेश – 70.00 करोड़ रुपए, केरल – 249.36 करोड़ रुपए, पुद्दुचेरी – 155.62 करोड़ रुपए तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह – 821.88 करोड़ रुपए| 

       सुनामी से प्रभावित लोगों के साथ राष्ट्र दृढ़ता के साथ खड़ा हुआ| राष्ट्रीय प्रतिक्रिया प्रशंसनीय थी और जो राज्य प्रभावित नहीं थे वे केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों में सभी प्रकार की सहायता प्रदान करने हेतु सामने आए | इस राष्ट्रीय प्रयास में योगदान हेतु सभी राजनीतिक दल, मीडिया एवं सिविल सोसाइटी संगठन आगे आए | प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में योगदान स्वरूप 800 करोड़ रुपए प्राप्त हुए| 

iv)  पुनर्निर्माण
      भारत सरकार का मानना है कि इस भयानक आपदा ने हमें यह मौका दिया हो कि हम प्रभावित क्षेत्रों के लिए मूलभूत संरचना एवं सेवाओं को ऐसा बनाए जिनका स्तर  सुनामी के विनाश से क्षतिग्रस्त मूलभूत संरचना एवं सेवाओं से बेहतर हो | इस विचार को ध्यान में रखकर, भारत सरकार ने योजना आयोग में सुनामी प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण, प्रबंधन एवं निगरानी के लिए एक कोर समूह का गठन किया है | कोर समूह ने सुनामी प्रभावित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण के लिए 9870.25 करोड़ रुपए के वित्तीय परिव्यय की एक व्यापक योजना तैयार की है, जिसके अंतर्गत ‌‌तमिलनाडु के लिए 4,084.79 करोड़ रुपए, केरल के लिए 1,470.46 करोड़ रुपए, आँध्र प्रदेश के लिए 138.11 करोड़ रुपए, पुद्दुचेरी के लिए 487.44 करोड़ रुपए तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के लिए 2,614.22 करोड़ रुपए तथा जहाजरानी क्षेत्र के लिए 775.23 करोड़ रुपए शामिल हैं|

    क्षेत्रवार वित्तीय परिव्यय में– कुल परिव्यय का 34% अर्थात् 3,298.71 करोड़ रुपए आवास, आंतरिक मूलभूत संरचना (जल वितरण, सीवेज, सड़क, विद्युत वितरण एवं ग्राम स्तरीय जल एवं सीवेज) शामिल हैं,  15% अर्थात् 1,519.42 करोड़ रुपए, जीविका,  जिसमें कृषि, मत्स्यपालन एवं समाज कल्याण के कार्यक्रम शामिल हैं, 38% अर्थात् 3,773.53 करोड़ रुपए मध्यम/दीर्घावधि पुनर्निर्माण जिसमें पत्तन एवं घाट, सड़क एवं पुल, विद्युत एवं संचार, पर्यटन तथा सामाजिक मूलभूत संरचना शामिल है, 9% अर्थात् 828.59 करोड़ रुपए पर्यावरणीय/तटीय सुरक्षा उपायों के लिए रखे गए हैं| कार्यक्रम के लिए निधि का स्रोत राजीव गाँधी पुनर्वास पैकेज (1,607.01 करोड़ रु.), बाह्य बहु−स्तरीय एजेंसियाँ (3,610.35 करोड़ रु.), जबकि शेष 4,652.89 करोड़ की सहायता आंतरिक स्रोतों से जुटाने की संभावना है | इस कार्यक्रम को 31 मार्च, 2008 तक तीन वर्ष की अवधि में कार्यान्वित करने का प्रस्ताव है | कार्यक्रम के लिए कार्यान्वयन एजेंसियां संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र एवं केंद्रीय मंत्रालय/विभाग होंगे| 

          दीर्घावधि पुनर्वास योजाना में 1.51 लाख स्थायी आवासों के लिए 3,014.39 करोड़ रुपए की लागत शामिल है | इस राशि में से 752.30 करोड़ रुपए की राशि भारत सरकार से अनुदान के रूप में आएगी तथा शेष राशि विश्व बैंक एवं एडीबी से करार के तहत आएगी | स्थायी आवास का निर्माण तटीय क्षेत्र के विनियमों को ध्यान में रखकर बहु−खतरा रोधी एवं उपयुक्त नगर आयोजना तथा सिविक सुविधाओं के साथ किया जाएगा | रोज़गार  के लिए कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र के पुनरुद्धार हेतु 375.95 करोड़ रुपए रखे गए हैं | इसमें तालाबों की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण, स्थान से सामान हटाना (साफ करना), सतह पर जमे लवण को हटाना, ऑर्गेनिक तत्वों का प्रयोग, जिप्सम का प्रयोग, रोक−बाँध बनाकर वर्षा जल संरक्षण, जलाशय/कुओं का निर्माण, पम्प सेटों की व्यवस्था, फसल संबंधी कार्यक्रम, नाले की सुविधाओं का निर्माण, कृषि उपकरणों की व्यवस्था शामिल हैं| 

           जहाँ पर तत्काल राहत एवं (बचाव)कार्य के लिए बाह्य सहायता की आवश्यकता नहीं थी, वहाँ सरकार ने सुनामी प्रभावित राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के लिए दीर्घावधि पुनर्वास/पुनर्निर्माण हेतु विश्व बैंक (डब्ल्यू बी), एशियन डेवलेपमेंट बैंक (एडीबी) तथा यू एन एजेंसियों जैसे बहु−स्तरीय एजेंसियों से बाह्य सहायता प्राप्त करने का अनुमोदन किया है | द्वि-पक्षीय सहायता भी स्वीकार्य है यदि वे बहु−स्तरीय एजेंसियों के माध्यम से प्राप्त हों | 

         बाहरी स्रोत से प्राप्त होने वाली सहायता में विश्व बैंक से 528.5 मिलियन अमरीकी डालर, एडीबी से 200 मिलियन अमरीकी डालर, आईएफडी से 30 मिलियन अमरीकी डालर प्राप्त हुए और जापान निधि से 7.50 मिलियन अमरीकी डालर प्राप्त हुए जोकि विश्व बैंक व एडीबी के माध्यम से दिए गए | 38.80 मिलियन अमरीकी डालर की अतिरिक्त सहायता के लिए बातचीत चल रही है| विश्व बैंक केरल में ग्रामीण जल आपूर्ति की पुनर्व्यवस्था, आँध्र प्रदेश में रोजगार पुन:सृजित करने, तमिलनाडु व पोन्डिचेरी में आवासीय व परिवहन मूलभूत अवसंरचना को पुन: स्थापित करने तथा दीर्घ-कालिक तटीय प्रबंधन हेतु अध्ययन में सहयोग करने के लिए सहायता प्रदान कर रहा है| एडीबी तमिलनाडु व केरल में परिवहन मूलभूत अवसंरचना, गाँवों की मूलभूत अवसंरचना और रोजगार पुन:सृजित करने के लिए निधि प्रदान कर रहा है| जापान निधि से प्रत्येक राज्य को गरीबी में कमी करने के लिए 2.5 मिलियन अमरीकी डालर प्रदान किए जा रहे हैं|

V: आगे की कार्रवाई 

    सुनामी से पूर्व, देश में आने वाली सुनामी आपदा की चेतावनी देने के लिए कोई प्रणाली नहीं थी | सरकार ने अब हिंद महासागर में अपने बल पर सुनामी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित करने का निर्णय लिया है | प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को स्थापित करने के लिए महासागर विकास विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो (क) विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, (ख) अंतरिक्ष विभाग (ग) वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् और (घ) विश्वविद्यालयों/विभागों की सक्रिय सहभागिता से इस कार्य का निष्पादन करेगा | परियोजना के प्रारंभ होने के साथ, संभावित भूस्खलन सैलाबों के साथ सुनामी और तूफानों के तरंगों की प्रचालनात्मक चेतावनी सितम्बर, 2007 से उपलब्ध होने लगेगी | एक बार 125 करोड़ रुपए की लागत से लगभग 2 वर्ष में यह प्रणाली लागू हो जाने के बाद इससे हिन्‍द महासागर क्षेत्र के अन्‍य देशों को भी सहायता मिलेगी| तकनीकी उपाय और सूचना की साझेदारी अंतरराष्‍ट्रीय एजेंसियों के साथ हुई सहयोग व्‍यवस्‍था का हिस्‍सा हैं| जहां भी आवश्‍यकता होगी, वहां सरकार विदेशों से आवश्‍यक तकनीकी सहयोग मांगेगी जिसमें संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ की एजेंसियां भी शामिल हैं | नीति यह है कि हम हिन्‍द महासागर में सुनामी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्‍थापित करने के लिए अन्‍य देशों के सहायता संघ का हिस्‍सा बनना पसंद नहीं करेंगे|   

             आपदा प्रबंधन की दीर्घकालिक रणनीति के हिस्‍से के तौर पर, आपदा प्रबंधन पर केंद्रीय कानून संबंधी एक विधेयक संसद में 11 मई, 2005 को पेश किया गया| विधेयक में यह प्रस्‍ताव है कि राज्‍य/ संघ राज्य क्षेत्र देश में आपदा प्रबंधन व्‍यवस्‍था का अभिन्‍न हिस्‍सा होंगे | इस कानून का अधिनियमन (इनेक्‍टमेंट) लंबित होने के कारण, एक कार्यकारी आदेश के माध्‍यम से नेशनल डिज़ास्‍टर मैनेज्‍मेंट अथॉरिटी (एनडीएमए) स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव है | एक बार इस केंद्रीय कानून के अधिनियमित हो जाने पर प्रभावी आपदा प्रबंधन के लिए संस्‍थागत व्‍यवस्‍थाओं को सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी | साथ ही, इससे राष्‍ट्रीय, राजकीय और ज़ि‍ला स्‍तर पर विभिन्‍न प्राधिकरणों को सौंपे गए कार्य के लिए जवाबदेही और ज़ि‍म्‍मेदारी भी बढ़ेगी| 

सरकार अपने लोगों को एक अधिक सुरक्षित और बेहतर गुणवत्ता वाला जीवन देने के लिए प्रतिबद्ध है| सरकार का यह प्रयास होगा कि पुनर्वास और पुनर्निर्माण पैकेज के पूर्ण हो जाने पर सुनामी की आपदा के ज़ख्‍मों को आधुनिक नागरिक सुविधाओं वाले आजीविका के बेहतर साधनों से भरा जा सके| सरकार सुनामी आपदा से प्रभावित लोगों को नए सिरे से सहयोग प्रदान करती है|

आँकड़ों की तालिका
विनाश

 

तमिलनाडु

केरल

आँध्र प्रदेश

पुद्दुचेरी

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

कुल

प्रभावित जनसंख्या (लाख में)

8.97

13

1.96

0.43

3.56

27.92

प्रभावित गाँवों की संख्या

376

187

301

33

192

1089

प्रभावित शस्य क्षेत्र (हेक्टेयर में)

19168

7763

302

792

11010

39035

मृत्यु

8009

177

107

599

3513

12405

क्षतिग्रस्त मकान

190000

13735

481

10061

21100

235377

विधवा

562

31

18

28

148

787

अनाथ बच्चे

289

3

6

39

143

480

क्षतिग्रस्त नाव

52638

10882

12189

6678

1401

83788

खोए हुए मवेशी

1653

0

86

2685

27331

31755

आर्थिक दृष्टि से क्षति (करोड़ रुपए में)

4528.66

2371.02

342.67

466

3836.56

11544.91

 बचाव कार्य

 

कार्मिक

जहाज

वायुयान

हेलिकोप्टर

अभ्युक्ति

थल सेना

8300

 

 

 

इन सभी की सहायता से, 6.47

नौसेना

5500

31

 

 

लाख लोगों को सुरक्षित स्थान तक

वायु सेना

3000

 

34

42

पहुँचाया गया और 28734 लोगों

तट रक्षक

2000

9

 

 

को बचाया गया |

अर्ध सैनिक बल

2107

 

 

 

 

कुल

20907

40

34

42

 

नागर विमानन

 

 

64*

 

6318 फ़ँसे हुए लोग, जिनमें पर्यटक शामिल हैं, को पोर्ट ब्लेयर से मुख्य भू-भाग ले जाया गया | 

 *: उड़ानों की संख्या दर्शाता है

तत्काल राहत

 

तमिलनाडु

केरल

आँध्र प्रदेश

पुद्दुचेरी

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

कुल

बचाए गए लोगों की संख्या

9,500

9,950

0

0

9284

28,734

सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाए गए लोगों की संख्या

487185

24978

34264

70000

30573

647,000

खोले गए राहत शिवरों की संख्या

421

231

65

48

165

930

राहत शिवरों में रहने वालों की संख्या

309379

171491

34264

45000

44201

604,335

तैनात चिकित्सा टीम

581

233

158

87

310

1369

  
राजीव गाँधी पुनर्वास पैकेज (करोड़ रुपए में)

 

तमिलनाडु

केरल

आँध्र प्रदेश

पुद्दुचेरी

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

कुल

राहत और प्रतिक्रिया

233.33

17.16

8.12

26.03

107.35

391.99

निर्वाह भत्ता

118.80

12.30

0.00

1.05

23.04

155.19

अस्थाई आश्रय स्थल

90.00

17.39

0.31

6.04

99.10

212.84

स्थाई निवास

650.00

50.00

2.30

50.00

0.00

752.30

राहत रोज़गार

54.00

26.00

12.60

1.95

9.75

104.30

मूलभूत संरचना

161.15

44.01

10.35

6.61

305.97

528.09

कृषि और पशुपालन

32.35

3.52

1.16

0.80

261.66

299.49

मछुआरों को सहायता

1007.56

78.98

35.16

63.14

15.01

1199.85

कुल

2347.19

249.36

70.00

155.62

821.88

3644.05

 सुनामी राहत, पुनर्वास, पुनर्निर्माण के लिए अनुमानित कुल पैकेज

क्रम सं.

निधि प्राप्त करने का स्रोत

राशि करोड़ रुपए में

1.

राजीव गाँधी पुनर्वास पैकेज

3644.05

1क

स्थाई निवास और

752.30

1ख

अन्य स्थाई मूलभूत संरचना

854.71

2

राज्यों में फैली बहु-स्तरीय एजेंसियां

3610.35

3

अन्य स्रोत जैसे योजना-सहायता, बैंक, वित्तीय संस्थान आदि

4652.89

4

कुल जोड़ (1+2+3)

11907.29


राहत सामग्री केंद्रों के मानचित्र (पावर प्वाइन्ट फाइल)